पोलिश सेम (Sejm) के किसी भी एकल सदस्य का यह अधिकार कि वह किसी प्रस्ताव को रोक दे या सत्र समाप्त करा दे, जिससे व्यवहार में कानून बनाने के लिए सर्वसम्मति आवश्यक हो गई।
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1652 में व्लादिस्लाव सिचिन्स्की ने पहली बार इसका प्रयोग सेम का सत्र समाप्त कराने के लिए किया; बाद में यह बाधा डालने और विदेशी प्रभाव का नियमित साधन बन गया। 'संघबद्ध' (Confederated) सेम इससे मुक्त थे, और 3 मई 1791 के संविधान ने इसे समाप्त कर दिया। विद्वान ध्यान दिलाते हैं कि यह मूलतः बराबरी के माने जाने वाले कुलीनों के बीच सर्वसम्मति के सिद्धांत के रूप में उपजा था, और बाद में गतिरोध के औज़ार में बदल गया।